धर्मों को इन्सानों ने ही बनाया हैं। सदियों पहले भी धर्मों को लेकर एक जंग सी झिड़ गई थी। लोग ईश्वर को जानने के लिए अलग-अलग धर्मों को बनाना शुरू कर दिए। जिस धर्म को आपने बनाया हैं उसी के लिए आप आपस में लड़ रहे हैं। ईश्वर का कोई धर्म नहीं होता वो एक हैं। ईश्वर यह कभी नहीं चाहेंगे कि धर्मों के चलते उनके बच्चे में लड़े-झगड़े। धर्म शास्त्रों के द्वारा सिर्फ उन्हें समझा जा सकता है कि ईश्वर क्या है और कौन हैं और उनके वसूल क्या हैं जो उन्होने इन्सानों के लिए बनाए हैं। आजकल जिस इंसान के पास ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा नहीं हैं वही लोग ज़्यादातर धर्मों का पालन करने का दावा करते हैं पर वो वास्तव में ऐसा बिलकुल नहीं कर रहे होते हैं। अगर वो वास्तव में धर्म का पालन कर ईश्वर से जुड़े रहते तो वो कभी भी आपस में काट-मार न करते , वो कभी भी आपस में भेदभाव नहीं करते , वो कभी भी स्त्रियों के आत्मसम्मान को चोट न पहुंचाते आदि जैसे बहुत सारे गलत कार्य न करते। बड़े अफसोस के साथ मुझे यह कहना पड़ रहा हैं कि लोग आज कल यही सब करते हैं। उन्हें एक समाज , एक राष्ट्र , एक दुनिया से कोई फर्क ...
समान नागरिक संहिता क्या है और अभी तक किसी सरकार ने इसे लागू क्यों नहीं किया हैं? इसे लागू करने से क्या-क्या फायदे हो सकते हैं?
"अपने-अपने धर्मों को अपने तक सीमित रखे, इसे राष्ट्र का कानून बनाने की कोशिश न करें क्योंकि जब आप ऐसा करते है तब आप अपने ही राष्ट्र की प्रगति में बाधा बनते हैं।" "आप जिस किसी भी धर्म के हैं अगर आपके पास मानवता नहीं हैं तो आप मान लीजिये कि आप धर्म को नहीं मानते बल्कि आप तो जो नहीं हैं वो बनकर धर्म का अनादर करते हैं।" समान नागरिक संहिता एक धर्मनिरपेक्ष कानून हैं जो एकता को दर्शाता है। यानी एक ही कानून सभी धर्मों के नागरिकों पर लागू होता है। यह कानून सभी धर्मों से ऊपर हैं। साफ़ साफ़ तौर पर कहे तो इस संहिता का किसी भी धर्म , जाति , वर्ग से दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है। इसे यूनिफॉर्म सिविल कोड भी कहते हैं। यह भारतीय संविधान के भाग 4 वे के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत आता है। यानी इसे राज्य के नीति निर्देशकों के तहत रखा गया है। इस संहिता में शादी , तलाक , गोद लेना और जमीन जायदाद के बंटवारे में एक समान कानून लागू करता है। वर्षों से सरकारें तो बदलती रही पर किसी ने भी इसे लागू नहीं किया। इस पर जमकर बहस भी हुआ पर समस्या जस का तस बना रहा। आखिर इसे लागू करने से पिछली सरकारें क्य...