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“आपने विभिन्न धर्मों को बनाया हैं और अब आप इन्हीं धर्मों को लेकर आपस में लड़-झगड़ रहे है, वास्तव में यह मानवता का विनाश का पहला कदम हैं।”

  धर्मों को इन्सानों ने ही बनाया हैं। सदियों पहले भी धर्मों को लेकर एक जंग सी झिड़ गई थी। लोग ईश्वर को जानने के लिए अलग-अलग धर्मों को बनाना शुरू कर दिए। जिस धर्म को आपने बनाया हैं उसी के लिए आप आपस में लड़ रहे हैं। ईश्वर का कोई धर्म नहीं होता वो एक हैं। ईश्वर यह कभी नहीं चाहेंगे कि धर्मों के चलते उनके बच्चे में लड़े-झगड़े। धर्म शास्त्रों के द्वारा सिर्फ उन्हें समझा जा सकता है कि ईश्वर क्या है और कौन हैं और उनके वसूल क्या हैं जो उन्होने इन्सानों के लिए बनाए हैं। आजकल जिस इंसान के पास ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा नहीं हैं वही लोग ज़्यादातर धर्मों का पालन करने का दावा करते हैं पर वो वास्तव में ऐसा बिलकुल नहीं कर रहे होते हैं। अगर वो वास्तव में धर्म का पालन कर ईश्वर से जुड़े रहते तो वो कभी भी आपस में काट-मार न करते ,  वो कभी भी आपस में भेदभाव नहीं करते ,  वो कभी भी स्त्रियों के आत्मसम्मान को चोट न पहुंचाते आदि जैसे बहुत सारे गलत कार्य न करते। बड़े अफसोस के साथ मुझे यह कहना पड़ रहा हैं कि लोग आज कल  यही सब करते हैं। उन्हें एक समाज ,  एक राष्ट्र ,  एक दुनिया से कोई फर्क ...